ध्येय वाक्य अन्य»
आध्यात्मिक दृष्टि से विकसित हो चुकने पर धर्मसंघ में बना रहना अवांछनीय है। उससे बाहर निकलकर स्वाधीनता की मुक्त वायु में जीवन व्यतीत करो।
- स्वामी विवेकानंद
February 8, 2012 VHV Web
 
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vandana sharma
23 Mar 2011
कभी तो याद करें...

वंदना शर्मा

आज स्वतन्त्र भारत का सपना अपनी आँखों में सजोंकर हंसते-हंसते मौत को गले लगाने वाले उन वीरों का बलिदान दिवस है, जिन्होंने अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों से अंग्रेजों की नींव हिलाकर रख दी थी। भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव भारत माता के इन तीनों पुत्रों को अंग्रेजों द्वारा भले ही फांसी देकर मार दिया गया हो लेकिन इनके द्वारा जलाई गयी क्रांति की ज्योति आज भी प्रत्येक भारतवासियों के दिलों में अमर है।....



सुनील दूबे
21 Dec 2010
अब का खाईब सलाद, पियजिया अनार हो गइल

सुनील दूबे
देश की जनता एक बार फिर प्याज के आंसू रोने पर मजबूर है। क्योंकि प्याज की आसमान छूती कीमतें खाने का जायका बिगाड़ रही हैं। खास बात तो यह है कि प्याज की कीमतें अभी और बढ़ सकती हैं। इससे पहले भी एक बार एनडीए के कार्यकाल में प्याज की कीमतों ने आसमान छुआ था। उस वक्‍त जनता का गुस्‍सा दिल्ली भाजपा सरकार पर फूटा और सरकार चली गई जो अभी तक नहीं लौट सकी है।

अवनीश सिंह
17 Jul 2011
जल ही जीवन

अवनीश सिंह

जल भी पर्यावरण का अभिन्न अंग है। मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है। मानव स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ जल का होना नितांत आवश्यक है। जल की आवश्यकता केवल मनुष्य के लिए ही नहीं बल्कि उन सबको भी है, जिनमें प्राण हैं। चाहे वह पशु-पक्षी हों या फिर पेड-पौधे। पुरातन समय से ही जल की महत्ता को मानव ने जाना और समझा है। ऋग्वेद की रचनाओं में जल की स्तुति की गई है। इतिहास गवाह है कि विश्व के सभी देश विभिन्न नदियों एवं घाटियों की गोद में फले-फूले और विकसित हुए ह

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