ध्येय वाक्य अन्य»
आध्यात्मिक दृष्टि से विकसित हो चुकने पर धर्मसंघ में बना रहना अवांछनीय है। उससे बाहर निकलकर स्वाधीनता की मुक्त वायु में जीवन व्यतीत करो।
- स्वामी विवेकानंद
February 8, 2012 VHV Web
 
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- स्वामी विवेकानंद
आध्यात्मिक दृष्टि से विकसित हो चुकने पर धर्मसंघ में बना रहना अवांछनीय है। उससे बाहर निकलकर स्वाधीनता की मुक्त वायु में जीवन व्यतीत करो।
ऋग्वेद
परमात्मा केवल उन लोगों की सहायता करता है, जो पूरी ताकत और उत्साह के साथ परिश्रम करते हैं।
रविन्द्रनाथ ठाकुर
अंधकार में ईश्वर समरूप दिखाई देता है; प्रकाश में वह विविध रूपों में दिखाई देता है।
स्वामी विवेकानंद
निःस्वार्थता बहुत ही लाभकारक है, केवल मनुष्यों में इतना धैर्य नहीं कि उस पर आचरण करें।
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