ध्येय वाक्य अन्य»
आध्यात्मिक दृष्टि से विकसित हो चुकने पर धर्मसंघ में बना रहना अवांछनीय है। उससे बाहर निकलकर स्वाधीनता की मुक्त वायु में जीवन व्यतीत करो।
- स्वामी विवेकानंद
February 8, 2012 VHV Web
 
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